निष्कामता में ही आत्मियता
हम संसारिक निष्कामता से कोसों दूर रहते है । सकाम हुये बिन कुछ करते अब हमसे नही होता । जब […]
श्री बूढ़ेनाथ विजयतेतराम
श्री बूढ़ेनाथ विजयतेतराम
हम संसारिक निष्कामता से कोसों दूर रहते है । सकाम हुये बिन कुछ करते अब हमसे नही होता । जब […]
️ अमंत्रं अक्षरं नास्ति , नास्ति मूलं अनौषधं। अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभ:॥ – शुक्राचार्य (शुक्र नीति) अर्थात कोई […]